बुधवार, 27 जनवरी 2016

जातिवाद मिटाने का वातावारण बनाईये:- ताराराम गौतम


संत मत से निकले जितने भी पंथ है- उनका एक मजबूत आधार समाज में व्याप्त जातिपरक भेदभाव, कुरीतियाँ और अन्धविश्वास से उत्पन्न उर्वरा भूमि थी। परन्तु आज वे सभी वापस उसी दल-दल में फंस गए। उसका सबसे बड़ा कारण यही कहा जा सकता है कि उनका कोई मजबूत दर्शन-पक्ष नहीं था, जो हर जिज्ञाषा और प्रश्न का माकूल जबाब देता। यही कारण है कि दादू, रैदास, कबीर, सेन, बाबा रामदेव, पलटू, जम्भा या वैष्णव या अन्य विद्रोह के जितने भी स्वर थे, आज नाम भर के
रह गए है। उनका मिशन पुन: ब्राह्मणवादी जातिपरक व्यवस्था की दल-दल में धंस गया और वैदिक या सनातनी लोगों से ज्यादा इनकी बांगे सुनाई देती है। नया मुल्ला जोर से बांग देता है- मुहावरा सार्थक। आजकल ये सभी बिगड़े हुए रूप में मौजूद
है। जो अपना मूल आधार भूल चुके है और भूलभुलैया में खो चुके है। वैदिक धर्म के विरोध में उभरे ये पंथ आज पुनः वैदिक
दल दल में धंस चुके है। दूसरा कोई इनका सुधार नहीं कर सकता। इनका अपना सुधार ये खुद ही कर सकते है । अगर
ऐसा नहीं हुआ तो लोग धीरे धीरे इनसे दूर होते जायेंगे। ऐसा मेरा विश्वास है।
यह इसलिए हुआ क्योंकि उनका दार्शनिक आधार मजबूत नहीं था। अतः ब्राह्मणवाद ने उनके लिए वह आधार बना कर अपने में खपा दिया और उनके विराट व्यक्तित्व को ब्राह्मणवाद में छोटा कर दिया। डॉ आंबेडकर इस बात को जानते थे इसलिए
उन्होंने अपनी विचारधारा को एक मजबूत आधार दिया। जिसमे छेड़ छाड़ की गुन्जाईस बहुत कम है। यह एक बड़ा फर्क इन संतो के आन्दोलन और डॉ आंबेडकर के आन्दोलन में है।
सौराष्ट्र में बाबा साहेब ने अस्प्रश्यों को आपसी जात-पात तोड़ने का उपदेश दिया । एक जंगी सभा हुई। कुछ जातियां आगे आई। उन्होंने ऐसा किया। बाकी पिछड़ी जातीय आगे निकल गयी। आगे वाली आगे ही रही। जिन्होंने ऐसा किया वे गिर गयी। मैंने इसका उल्लेख अन्यत्र किया है। इसलिए सावधान रहे।
जातिवाद मिटाने का वातावारण बनाईये। सभी लोग जातियों को ख़त्म करिए। एक दूसरे पे दबाब से जातिवाद ख़त्म नहीं होता । वह जातीय संघर्ष का छुपा रूप होता है। कुछ लोग तथाकथित निम्न जातियोंको जाति तोडने का कहेंगे, कहते है, पर उच्च जाति के लोगों को नहीं कहेंगे या नहीं कहते है- इसका सीधा सा अर्थ यही है कि वे जाति को बहुत महत्त्व देते है, उनकी जाति गत उच्चता बनी रहे इस हेतु ही वे निम्न जातियो को जाति तोड़ने का उपदेश देते है। इस में बहुत बड़ा दोगलापन है।
Tararam goutam 

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